असम राइफल्स पर नियंत्रण संबंधी निर्णय

असम राइफल्स पर नियंत्रण संबंधी निर्णय

चर्चा का कारण

रक्षा मंत्रालय और ग्रह मंत्रालय दोनों के नियंत्रण के अधीन असम राइफल्स आती है।

पृष्ठभूमि:

कुछ समय पहले दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी कि असम राइफल्स को रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत लाया जाए।

यह याचिका असम राइफल्स वेलफेयर के द्वारा दाखिल की गई थी।

असम राइफल्स पर नियंत्रण संबंधी निर्णय

असम राइफल्स के बारे में:

असम राइफल्स सबसे पुराना अर्धसैनिक बल है  इसे नॉर्थ ईस्ट का प्रहरी भी कहा जाता है।

  • असम राइफल्स गृह मंत्रालय (MHA) के  नियंत्रण के अंदर 6  केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में से एक है।
  • असम राइफल्स को 1835 में कछार लेवी नामक यूनिट नाम से बनाया गया था। इसका उद्देश्य नॉर्थ ईस्ट में शांति बनाए रखना था तथा ब्रिटिशर्स की सहायता करनी थी।
  • असम राइफल्स ने दोनों विश्व युद्धों में भाग लिया।

असम राइफल्स के प्रमुख अधिदेश:

. इंसर्जेंसी को रोकना और सीमा सुरक्षा करना

. संचार और चिकित्सा सहायता प्रदान करना

असम राइफल्स की विशेषताएं:

यह दोहरे नियंत्रण वाला एकमात्र अर्धसैनिक बल है।

  • असम राइफल्स का प्रशासनिक नियंत्रण गृह मंत्रालय के पास है, जबकि परिचालन नियंत्रण रक्षा मंत्रालय के पास है।
  • इसका अर्थ है कि असम राइफल्स के लिए वेतन और बुनियादी सुविधाएँ गृह मंत्रालय द्वारा प्रदान की जाती है, परन्तु, इसके कर्मियों की तैनाती, पोस्टिंग, स्थानांतरण और प्रतिनियुक्ति का निर्णय भारतीय सेना द्वारा लिया जाता है।

गृह मंत्रालय तथा रक्षा मंत्रालय, दोनों असम राइफल्स पर  नियंत्रण क्यों चाहते हैं?

गृह मंत्रालय का तर्क:

गृह मंत्रालय का कहना है कि, सभी सीमा रक्षक बल, हमारे कंट्रोल में आते है तो असम राइफल्स भी हमारे नियंत्रण में आने चाहिए ताकि सीमा सुरक्षा बेहतर और समन्वित हो।

सेना का पक्ष

  • असम राइफल्स एक सैन्य बल है ना कि पुलिस बल।

इसका नियंत्रण होम मिनिस्ट्री को देने या सीएपीएफ में विलय करने से कार्यकुशलता में रुकावट आयेगी और भ्रम की स्थिति पैदा होगी । जो कि सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है।

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