Unlawful Activities Prevention Act - UAPA 1967 : UPSC IAS in hindi

Unlawful Activities Prevention Act – UAPA 1967 : UPSC IAS in hindi

अदालत (Court) समय समय पर ही केंद्र और राज्य सरकारों को UAPA act के लिए लताड़ लगती रहती है , चाहे वो दिल्ली दंगे हो या उत्तर प्रदेश में हुई हिंसा ।

हाल में त्रिपुरा सरकार को कोर्ट ने इसी संदर्भ में टिप्पणी की है तो आखिर ये गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम है क्या?

गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम 1967 – Unlawful Activities Prevention Act

  • नागरिकों द्वारा भी अक्सर गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम /unlawful activities prevention act की निंदा की जाती है , समाज का यह तर्क होता है की यह अधिनियम विधिक शासन और निष्पक्षता के तर्क के विरुद्ध है ।

मूल रूप से इस कानून को 1967 में लाया गया था तथा इसे 2004 और 2008 में आतंकवाद के विरुद्ध कानून के रूप में अमेंड किया गया।

आतंकवाद से निपटने के लिए यह सामान्य कानूनों से अलग है तथा इसके कुछ नियम भी सामान्य अपराधों के नियम से अलग हैं।

इस कानून के तहत सरकार किसी भी संस्था /assosiation को अवैद्य घोषित कर सकती है , अगर सरकार को ऐसी जरूरत महसूस हो ।

सरकार एक ट्रिब्यूनल की स्थापना कर सकती है , जिसको “Unlawful Activities (Prevention) Tribunal” कहा जाएगा । इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति की योग्यता हाईकोर्ट के जज से कम नहीं होगी ।

इस कानून के अंतर्गत व्यक्ति या संस्था से जुड़े किसी भी फंड पर रोक prohibit लगाई जा सकती है ।

इस एक्ट के अंतर्गत किए गए अपराध संज्ञेय होंगे ।Offences to be cognizable.

अध्याय 5 में आतंकवादी गतिविधियों के अपराध और उनको दिए जाने वाले दंड आदि का व्यवरण है ।

अगर जरूरत समझी गई तो रिव्यू कमिटी /review committee को कांस्टीट्यूट करने का भी विवरण है । जिसमे अध्यक्ष और सदस्य होंगे , जिनकी संख्या 3 से अधिक नही होगी ।

Unlawful Activities Prevention Act - UAPA 1967 : UPSC IAS in hindi

Unlawful Activities Prevention Act के संभावित दुरुपयोग

इस एक्ट में आतंकवादी गतिविधियों की परिभाषा स्पष्ट नहीं दी हुई है इसमें दिए गए बिंदु संयुक्त राष्ट्र में दी गई परिभाषा से भिन्न है।

भारतीय संविधान में जमानत को स्वतंत्रता का अधिकार माना गया है किंतु UAPA कानून के तहत जमानत से इनकार हो जाता है।

इस कानून को राज्य की अतिक्रमणता माना जा सकता है । यह कानून किसी भी व्यक्ति को आतंकवादी साबित करने के लिए राज्य की शक्ति को असीमित कर देता है ।

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